पृष्ठ:अणिमा.djvu/७४

विकिस्रोत से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
७२
 
 

स्वामी जी के दशेनों से।
पीटकर बराबर एक खेत कर दिया गया,
बड़ा शामियाना तना।
तोरण बनाये गये।
द्वारों पर दोनों ओर
कलस रखे गये
जलपूर्ण, संदुर से
स्वस्तिका खींच कर,
आम्र-पल्लव, धान-भरी
परई, कच्चा छोटा
नारियल रखकर।
मञ्च सजा पुष्प और पल्लवों का शोभापूर्ण।
चित्र रामरुष्ण का
रक्‍खा गया तख़्त पर
फूलों से आच्छादित।
रँगे हुए कागज़ों की ज़ञ्जीरें डाली गई।
'स्वागत' प्रवेश-द्वार पर लगा हुआ विशाल।
बाल-वृद्ध-युवा-नर-नारी आते जाते हुए।