पृष्ठ:अतीत-स्मृति.pdf/१४४

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१२-बौद्धकालीन भारत के विश्वविद्यालय

इस लेख मे बौद्धकालीन भारतवर्ष के विश्वविद्यालयो का सिलसिलेवार संक्षिप्त इतिहास लिखा जाता है। श्रीयुत रवीन्द्र- नारायण घोष, एम॰ ए॰, ने डॉन् सोसाइटी को मैगज़ीन में इस विषय का लेख अंगरेज़ी में प्रकाशित किया है। उसी के आधार पर यह लेख लिखा जाता है।

बौद्धकाल तीन युगो मे बाँटा जा सकता है। पहला युग गौतम बुद्ध के समय से शुरू होता है और पाँच सौ वर्ष तक रहता है। इस युग के बौद्ध साधुचरित्र और सच्चे त्यागी होते थे। दूसरा युग ईसवी सन् के साथ प्रारम्भ होता है और ईसा की छठी शताब्दी में समाप्त हो जाता है। इस युग मे बौद्धों ने पहले युग के गुण अक्षुण्ण रखने के साथ साथ शिल्पकला मे भी अच्छी उन्नति की थी। सातवीं शताब्दी से तीसरा युग लगता है। उसे तान्त्रिक युग भी कह सकते है। उसमे बौद्ध महन्तो के चरित्र बिगड़ने लगे थे और पहले को जैसी त्यागशीलता जाती रही थी। परन्तु उन लोगों ने आयुर्वेद और रसायन शास्त्र में खूब उन्नति की थी। उनमें से प्रत्येक युग के विशेषत्व की झलक उस समय के विश्वविद्यालयो मे अच्छी तरह पाई जाती है।