पृष्ठ:अद्भुत आलाप.djvu/१७

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आकाश में निराधार स्थिति


हिंदोस्तान की सारी योग-विद्या अमेरिका पहुँच गई है, और अमेरिका की पूर्वोक्त सभा के चंद योगी इस विद्या को, बहुत थोड़ी फ़ीस लेकर, सिखलाने को राज़ी हैं; यहाँ तक कि कितने ही आदमियों को उन्होंने पूरा योगी बना भी दिया है। यह योग- शिक्षा डाक के ज़रिए वे लोग देते हैं; परंतु कई 'डालर' फ़ीस पहले ही भेजनी पड़ती है। एक डालर कोई तीन रुपए का होता है। इन काग़ज़ों में एक साहब और एक बंगाली बाबू का नाम था, और लिखा था कि ये लोग अश्रुत-पूर्व योगी हैं। इनमें इस देश की विद्या की, इस देश के पंडितों की, इस देश के योगियों की, बेहद व बेहिसाब तारीफ़ थी। उससे जान पड़ता था, जैसे यहाँ गली-गली योगी मारे-मारे फिरते हों। हमने इस सभा को एक पत्र लिखा। हमने कहा कि आपके अद्भुत योगी--बंगली बाबू--का यहाँ कोई नाम भी नहीं जानता, और योगसिद्ध पुरुष यहाँ उतने ही दुर्लभ हैं, जितना कि पारस-पत्थर या संजीवनी बूटी या देवलोक का अमृत। अतएव आपकी सभावालों को यह योगविद्या कहाँ से और किस तरह प्राप्त हुई? खैर, हम भी आपसे योग सीखना चाहते हैं, और फ़ीस भी देना चाहते हैं; परंतु डालर-दान के पहले हम आपसे योग-विषयक एक बात पूछना चाहते हैं। यदि आप हमारे प्रश्न का ठीक-ठीक उत्तर भेजकर हमारा समाधान कर देंगे, तो हम आपकी सभा से ज़रूर योग सीखेंगे।

अमेरिका दूर है। इससे कोई डेढ़ महीने में उत्तर आया।