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पृष्ठ:अन्तस्तल.djvu/३१

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और बाँस का बल्ला। उन्होंने गली के छोर में आकर गेंद लपक ली। हरा कोट पहने थे और सिर पर मलमें की टोपी थी। छोटा सा मुॅह था और सुनहले बाल कन्धे पर लहरा रहे थे। उम्र कितनी थी सो नहीं बता सकता, जिस बात को समझने का ज्ञान नहीं था -- आवश्यकता भी नहीं थी, अब वह कैसे याद आ सकती है? ये मेरे ऑखों में गढ़ गये। मैंने आगे बढ़ कर कहा -- "तुम खेलोगे?" उन्होंने कहा -- "खिलाओगे?" मैंने खिला लिया। वही पहला दिन था। इस जन्म में यही पहली मुलाकात थी। उसी दिन से हम एक हुए।