पृष्ठ:आकाश -दीप -जयशंकर प्रसाद .pdf/१२९

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चूड़ीवाली

"अभी तो पहना गई हो।"

"बहूजी, बड़ी अच्छी चूड़ियाँ हैं। सीधे बम्बई से पारसल मंगाया है। सरकार का हुक्म है; इसलिये नयी चूड़ियाँ आते ही चली आती हूँ।"

"तो जाओ सरकार को ही पहनाओ, मैं नहीं पहनती।"

"बहूजी! जरा देख तो लीजिये।" कहती मुसकराती हुई ढीठ चूड़ीवाली अपना बक्स खोलने लगी। वह २५ वर्ष की एक गोरी छरहरी स्त्री थी। उसकी कलाई सचमुच चूड़ी पहनाने के लिये ढली थी। पान से लाल पतले-पतले ओठ दो तीन वक्रताओं

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