पृष्ठ:आकाश -दीप -जयशंकर प्रसाद .pdf/२३

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ममता

रोहतास-दुर्ग के प्रकोष्ठ में बैठी हुई युवती ममता, शोण के तीक्ष्ण गंभीर प्रवाह को देख रही है। ममता विधवा थी। उसका यौवन शौण के समान ही उमड़ रहा था। मन में वेदना; मस्तक में आँधी, आँखों में पानी की बरसात लिये, वह सुख के कंटक-शयन में विकल थी। वह रोहतास-दुर्गपति के मंत्री चूड़ा-मणि की अकेली दुहिता थी, फिर उसके लिये कुछ अभाव होना असंभव था, परंतु वह विधवा थी,---हिन्दू-विधवा संसार में सबसे तुच्छ निराश्रय प्राणी है---तब उसकी विडम्बना का कहाँ अंत था?

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