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पृष्ठ:आलमगीर.djvu/३३७

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मालमगीर हिन्दू सौदाग पर पार प्रवियव पुसी र बदा दिया। लोग मुसलमान हो पाते थे, उने इनाम मिलते थे | मीन-चायवाद मिलती मी, हरे पर मियो , करो कुरण मिझ पाता या, विकार-मत्त बापदाद पर उनका प्रषिकार मान लिया बावा या १५.१ में पारणा मे या क्म दिया बिगबोसकर बसून करने पाले सब मुसनमान हीरो और हादिमों और वाहवारी पाशा दी किये रिन्यू पेराम और दीवानों को निधम र मुसलमानो भे मरती करे। मत तक मिनून को मुखसमान बनने के लिए एक प्रसिदभावव बन गई। मुखहमान दोने के लिए पियों पर बैठा पर गागाभाग इन निधो पाते थे और उमें दैनिक वनपयोगी पाती थी। माय १५५ में उसने इरम दिया कि बोके सिवा और हिम हामी, मोरे और पासपी पर म पदमे पाए, न पियर बाये। इसी समय अपने सामाग मर में दीपों में मरने वाले धार्मिक मेनो में पदम दिया। की और दीपाली रसदार मी पावनिक रूप से नहीं मनाए जाते थे। इन पापा परिणाम हुमा कि हिन्दुओं में विद्रोही माबना पदवी गई। १५में मपुरा में मानक बिद्रोह ठठ सा दुमा । इस विदारका मेतृत्व तिसपर मार गोकुला ने किया । मधुप पाकिम अमुल मयो इस विद्रोह में मार गया गया । गोहता ने शारापार भ परगना कर दिया। अन्त में गोकुहा प्रेमाने के लिए पसी मारी सेना मेगा, विप्र मेता पवन पीसों था। उसने पारस्व रमन मिा और गोड़साधे सपरिवार और रसिया | बेकिन इसके पोरे दिन बाद ही पायम रे मेतृल में बाये मे फिर मपुप में भाप निसामिा। सन् १९४५ में सवनामी सम्मान पुचो मे, भिमण नारनौल था, दिन रिसा । पा मग पावसीम एक मापुर में परिपत हो पप इसमें