पृष्ठ:आलमगीर.djvu/३४७

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२२१ पासमगीर पिसाबीता और कुछ महीनो बाद मौका पार मराठे उसे बीन से और बारशाहको फिर चदाई करनी पाती। बदी हुई नदियों, पसरह से मरे हुए रास्तों, कपा-माया पारियों व पगणियों में पसमे से मुगल सैनिक इवोत्तर हो गए। पापा मम्पूर माग खरे होते। बारबरदारी के बानवर भूम और पकाबर से मर बावे और याही सैनिक हमेशा भूमे गो, साने पीने की कमी होती, कभी समाप्त न होमे बाते शाही परमानी से प्रपिपरीमद गए भोर परमावरमाला गया कि मोर सुरती प्रत्येक पदाका बालन करे। अब बा काही वर्ष प्रभूदा था और मृत्यु उसे पायें प्रोर मे परती हुई मी मागी पी। उसका प्रवाशी प्रशासन विभाग प्रसमस पापा उसे बीस गपापा। शादी कोष खाली हो गया पा, वाग्राम विवालिया था, तीन तीन तास वनम्यो पदी ईपी मोर भूतो मरने वाले सिपाही को पर मामादा पे । यादो पमरयमे कालो बगान से मुशिरकुतीबाग मेमो पाने वाली रकम से विटी वर सामा बाठा या, बिहीबसी उत्तरठा से सारी कीपाती दी। सेतो में न पप पेन पतह । पाा मनुध्या और पामो र बिसी दीम पड़ती थी। गय प्रदेश ऐसा पीपन दीसवा पानि-चार दिन निरन्तर मामा करने पर ही पी माय पादपकपील पाया था। प्रकार स्थापित किया हुमा और शारयाँ एप पमय बिमा दुमा संसारपरि मुगल साम्राय सबो बारपाकमो बाली वाम्दी प्रत में मधुरमुत्त में पहुंच गया। उसकी फौच में राममिनार एक बास प्रारमी मर बारे और मरने पाले पाको बारबारमा श्री सम्मा तीन नाब से भी पर पहुँच भावी पी। १०.२ से १०ीमो में रविम में प्रभोर महामारी से पीसनामारमी मर गए । अब पूरे राम में मराठोका मा पा । रमोने बारे पस्ने र