पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१०४

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


10. 'आलम सुकवि कहै तन चीत्र कान्ह छवि, . 1. जोग देन आये तुम कहा हम जागी है। जोग तो सिखैये ताहि जोग की जुगति जाने, जोग को न. काज हम बंसीरस भोगी हैं ॥२०॥ याँसुरी :सयद सिंगोनाद पुरि पूरि रहे, ताही को. अदेस' सोई तन मन धुनि है। .. यिरह की ज्वाल साधे साधे. जतु नैननि को, निद्रा तन भूख साधे साधे उनमुनि२ हैं । 'पालम' सुकविः यहि जुगति जागै.सु जोगी, . . अलि। उपदेस हा..सुन्यौ है न सुनिहै। सुमिरन मौन उर, ऊरध. उसाँस लधे, जैसे विजयासी ऊधौ ऐसेकहा .मुनि हैं ॥२०॥ चाहती सिंगार तिन्है सिंगो सो सगाई कहा, श्रौधि को है आसातौ अंधा कैसे गहिये। ' ____ चिरह अगांध तहाँ सुन्नि की समाधि कौन, जोग, काहि भाव जु घियोग दाह दहिये। 'सेख' कहै मैन मुद्रा मोहन जुलाये, पन, मुद्रा लानों काननि नुने ई.सूल सहिये। थैलांग लगाने कोई जी घरो मारो होगा । ।। ऊधौ पते घी की पिचारि यात काहिये ॥२०॥ rantimor rormittirror.. ... ... प्रदेस -आदेश शाज्ञा । उनमुनि:- योग की एक मुद्रा । ३. प्रधारी झोलो। - मुन्नि :शुन्य । ५-लग- लगन ।:: . .