पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१०५

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आलम फोलि " गाँसी जाहि मृत ताधि हाँसीन हसाये आये. पासी' पर पेम सुनि साँसी कहियत है । मन गये मानस मरें मारि साँस लेन, परगट नैसम् .. उदासी कहियतु है । 'सेख' कहे सोई गात हरि विटुरत ऊयो, वावरे. 'विफल प्रजवासी काहियतु । सुर याँसो घेधत यिसारे सर च्याधि सोई, .. तात घेड़ो यधिक विसासी कहियतु. है ॥२०६० चारै ते न पलक लगत यिनु साँवरे ते; घावरे अजान ऊधौ भले उपदेस है। 'तादिन ते पन सूनो घर है दहत दुनो, .. तारनि५ में ज्योति नहीं जटा भये फेस है। 'पालमा विहान छिन जानो जात कोटि दिन, .. ____ कौन रैन की समाई 'सुरति न स है। इम ह. ते स्याम दूरि स्यामते हेम दूरि,.. चै तो बांछे काछे स्याम सखी मैले भेस हैं ॥२०॥ वृमि के अयूझ ऊधौ होत ऐसी-धूझियै रे, १... . जो पै,ऐसी घूझ तौ अबूझ, किन बूझै जू। झखत झुरत., झखकेतऊ खिझावै अकि, ... .. तुम मुकयतः मुठो जूझ कौन. जूझै जू। .. १-पासी: फांसी। २-साँसी(साँची) सत्य। ३-चासो पंशी। ४-वारै-थारंभ हो से। तारनि-नेत्र की पुतलिया। । १-नेस-तन । " .., ,