पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१३१

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1. भालम कैलि भीतर की भीत 'कहूँ लग्यो है पछौस कि... ___ रीति यई नही की विदेही नियहंतु है। एक दकं हेरत हिरोइरहों चित्त बिनु, मित्र को वियोगी मानो चित्र है रहतु है १२६८) ...' वता दौरि दौरिद्वारे पायें ऐसे दिल भी मानायर ' जिया' है 'पखेरू ते. दम्माये के नारे का । । परा मेरी सूति के नरं गिरदाय बीच, फूल सा. फकीर फिरे साँझ लीसकर का । हरद सा है जु रहा दरंद न' जार' कहा. . . मुआ है हिलाकरे योच मारना क्या मारे का ! सारा दिन फिराकर तेरेई फिराक गोत्र, जो न चाहे चितमोती चारा क्या विचार का ॥१६॥ दान की न पानों की प्राथै सुधि खाने की सु.. गली महको 'श्रराम खुसखाना है। रोज ही सों है तुराजी यार को रजा योग, ....नाजर की नजर जातीर का निसाना है।.. 1-किया? मदार का नाम का पदाधना डाला। २--गा १- मंत्री -हिनाक-मृत्यु४-पिराक-तलास -मान । ६-रोग रोना। नागदाव मार।