पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१४२

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. . AIRelimm --- विपरीति वर्णन . विपति वर्णन "artisment 11 । [ २६० ] ताह त ायगगात रचीरति मोति धंसै हँसि हंस विहंगम फ़ेद छुटी अटकीलसो छिटकी छटे अंग्रज्यों, गंग तरंगम हा जस्ता प्रालिमा धार सहन है झो कुच मेरु मिरे लिय जंगम हालहिये हरि के जु लसै मानो होत.सितासित सागर संगम. [२६१ ] पति उदी: विपरीति के अंग. करी ललना भुव भंग अधंगति 'आलम' ओझल आलि.को गति ऐसी कशाप्रयकोकि उमंगति लाल छुटी लट सो मुकुता लर अमजुटी श्रम के कन संगति लार सुधानिधि राजको राहु चल्यो पनहासुचली.उड़ पंगति काल कर विपरीति कला रवनी नंदलाल उमै पुनि मारे अधको धसिगो पटसीसते निकसी कयरीक पनी कचनार 'पालमा गोरे लिलाट लसे ललित तिफलसराउ के धारे ग्रंद्वितं इन्दु की कोरनि मानहु मंदित इंदुए मोरनि तारे १-नहामु - चोरी का पतालगाने के लिये चोर को पकड़ने के रिपे।।।