पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१६

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पालम-केलि - MAKER पाल-लीला पालने खेलत नन्द-ललन चलन पलि, गोद लै लै खलना फरति मोद गान है। 'सालमा सुकवि पल पल मैया पायै ख, पोपति · पोयुप सुपारत पय , पान है। नन्द सो फहति नन्दरानी हो' महर! सुत चन्द को सी फलनि पदतु मेरे जान है। बारदेखि सानंद सो प्यारे कान्द आनर में, धान दिन श्रान घरी पान पयि स्थान है ॥ १ ॥ मीनी सी #गृली यीच झीनो थांगु झलकतु, अमरि झुमारि अकि ज्यों ज्यों भूले पलना । धुंधुरु घूमत पने धुरा' के छोर घने, - धुंधरारे पार मानी धन चारे चलना । 'पालमा रसाल जुग लोचा विसाल लोल, . ऐसे नन्दलाल अनदेखे पहूँ कल ना । पर घेर फेरि फेरि गोद लै लै घेरि घेरि, . टेरि टेरि गाये गुन गोकुल की ललना ॥२॥ mmmmmmmmmmmmmmrammar १- धग- घुनघुना, काठ का रंगीन गोता जिसमें धुंधुर वा कोडियों लगी होता है और जो पालने में धा खटकता है। W.AAV