पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१६१

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४० बालग-फेलि [ ३५ ] मंडित पान प्रचंड अखंडित संधि सिलीमुख दंडि फुदंडन 'आलम लै भयनी कंपनी चल्यो आयतु राम अडंडन डंडन हे दसमाथ सनाथ जी करि माथ पुनीत है के घर मंडन तारिका तेज उतार धारक तारिफहै खर दूपन खंडन cudeech (कुचे छवि) : ... [ ३५६ ] अति आतुर चातुर कान्ह रमै तन में रस रासि नई सँचरै कपि मालम' याम बिहार बढ़े सजनो सिख चित्त सबै विसरे मुन्न पै कच के अधिकारी खुले अध चौकी जगम्मग जोति करें उत द्वै'मानो सूर उदोत कियो इत ओर. सुमेरु फुह उतर ३६० अलि कान्ह लता-निता मधि में मधु पान कियो मन मौत' समैं फरि 'पालम' मध्य मुचे सकुची गति उर्द्ध करी भ्रकुटी रिस में. पिनीला निचोल उरोजनि त्यो मसंश्यो परिमन मिस में फनाचल प्रशासन को रयि को कर दौरि परी निसि में, १-मनमौत = मन मावत, मनभाया। २-परिरंभन = थालिंगन। -ma -Ran - - - - - -