पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/१९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


श्रालम-कलिम मन को सुहेली' सय करती सुहागिनि सु-. अंक की कोर दै के हिये हरि लाया है। कान्ह मुख चूमि चूमि सुख के समूह लै ,.. फाह कारि पातन पतोखी दूध प्यायो है। श्रालम अखिल लोक लोकनि को भंसी ईस, सूनो के ब्रह्मांड सोई गोकुल में आयो है। , ब्रह्म त्रिपुरारि पचि हारि रहे ध्यान धरि, व्रज की अहीरिनि खिलौना करि पायो है ॥ चारोदस भौन जाफे रवा एक रेनु फोली; ।' ___सोई नांगु रेनु लाये नन्द के पास की। घट घट' शब्द अनहद जाको परि रह्यो, - तेई तुतराइ पानी तोतरे प्रकाश . की। 'पालम' सुकधि जाके भास तिहुँ लोक प्रस, तिन जिय पास मानी जंसुदा के पास हो। इन के चरित चेति निगम फहत नेति, जानी न परत पछू गति अविनास की ॥६ । सात xoss .' . .१-गुली = पुखएफ सीना। २-तोरसार । १-पतोशो-को पनी छोटी दोनिया । ४-अंषीशान