पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/२३

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यालम लि , 'पालम' कहै दो तनु कायमै तायो तामैं, ऐन मैन ,जोति रस हीरा थोप दीनी है। . और है सिंगार भार तुही धापनो सिंगार, _ विधि है सुनार तू जराड़ जैसी होनी है ॥१६॥ चितवत और लाग घोले और जोति जागै, हँसे कछू और ससे औरई निकाई है। अन अङ्ग मोहनी मोहन मन मोहिये. को, एन-नैनो मानो मैन मोहनी वनाई है। 'बालम' कह हो रूप ागरो समातु नाही, छवि छलकति इहाँ कौन फी: समाई है। भूपन को भार है किसोरी धैस 'गोरी वाल... तेरे, तन: प्यारी, फोटि.. भूपन गुराई है ॥१७॥ मक हो इहाँ काम गरी बाल ७il ऐसे रूप देस की लुनाई लुटिः लई है मु, . नई नई छवि अङ्ग अङ्ग उमगति है। • जाई की सो माल सु लजा रही काहे ते सु, जाइ जाइ हरि जू के हिये में खंगति है। 'आलम' कहैं हो पड़े वार हैं सेघार मये, तेरी तरनाई 'सु-जरा सी जगति है। मोतिन को हार हिये होस ते पहीरै नहीं, ,' पोत' ही के छरा 'पछरा सी गति है ॥१॥ Sr...... ..... 1-पननैनो-मृगनेनौ। २~यागरो-यहुत अधिक। -संगति है- सुमती,चोट करती है। ४-पोत-घरा-काँच की छोटी गुरियों को कंटो।