पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/४०

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२५ नायककी इती. नायक की दूती

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फाम रस माते है. करेंरी फेलि कीन्ही कान्ह फुलनि की मालिका मीडि मुरझाई है। 'पालमा सुफवि यहि और सीन जानो यति . ऐसी नारिसुिकुमारिकही फौने पाई है। • कमल को पात लैले हाथुयाको गात छु ' हाथ लाये। मैनी होय गांतं की निकाई है। अंचर दै. मुख सनमुख तासो पात कीजै, ना तोउसाँसोलागैः मुंफुर की हाई, है ॥५७ ॥ हो तो.ल्याई कालि प्यारे फोटिक जतनु फरि, it 1: तुम ऐसे रोस होररुसाईसुतिकहा जुः की। 'पालम: विलोकिमोहि मुख.मोस्यों दौर में : 1- मैं हूं मन में कह्यो सुबाती रैनि श्राजु की। अलप ययस अलबेलीये खरीय बाला नवेली.न लीजै यो खिझाइ धसिता की। ____ कर परसत फुभिलात' कलेवर वाको. . ___याही तो है एहो लाल फूल की सी नाजुकी ॥५८|| .' १ मुकुर को हाई है = आईने की तरह उसको मुख मलीन हो जायगा । २-तौ में आई = ताव में आकर, कुछ हाफर ! ३-चसितावश्यता । , ४- माजुको मुकुमारता 11- 1-