पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/४९

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Tालम लि " "पालमा सुकयि पचि रची है विरंचि ऐसी,' '. नेक हूँ न देखि लेद कहा तुमै शान है। रति को सुभाउ पेन मैनका के हाउ भाउ... रम्भा फेसे रूप सय :गुन की निधान है ॥७॥ यदन बिलोकि साधर सुधा की पिबुध करे, कुमुदिनि फूली जानि कुमुद को पन्धु है . . चम्पा, सिंह, सारस, करिनि, कोकिला, कदलि,.. योजु, यिय, लीने सप हो को मन बन्धु है । 'पालमा सुकवि पेप्ती कामिनि यिचित्र रचि, . और को जु रच्यो चाहै तू तो विधि अन्धु है । जैसीऐ गुननि अति आगरी चतुर. ,हरि, ... तैसोई सरूप एक : सोनों नौ सुगन्धु है। कंचन को चेलि तन बानि५ सी-बढत दिन, छिन छिन रूप जोति. नैननि समाति है। भारी सो लगतु हियो ज्यों ही .उर ऊँचो होतु,' डगनि भरित 'कटि टिये उरानि है। 'पालमा सुरुषि हरि मोहति मोहनी है के,' :... ___ ने तिरछौ हैं चाहि मुरि मुसुकाति है। योजत चपल जकै मैनु थकै मैनु यकै, . . ., सोभा की. रसाल याल यानि न जाति है HEN १-चिरडा उयोग करके । २--साथ इच्छा। ३-कुमुदयंधु चमा। ४-चंस...........विध रूपातिशयोक्ति अलंकार द्वारा इमाम अर्थ समझो। ५- पानि रंग। -दिन-प्रतिदिन। - - - . . . - - - -