पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/५५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


. ४० श्रालम-केलि असियन 'लागी ढरी तय लगि फेरों करो; : तेरी मनु माने तय, मेरी यहै. काजु है। सजनी बुलाई सय सौज लेन' धाई तय, सीह करों साजन समीप ही को साजु है । फालि मुकि' घेठी आजु हँसि घर पैठो, मिटो: ___ मान मद, भयो याके मदन को राजु है । सीझी२.वहै घात जाते रात पीरे, गात भये, .... __ स्वीझी नहीं कान्ह तुम्हें रीझो यह आजु है ॥३॥ रस में बिरस.जानि कैसे घसि को आनि,.... हाहा करि मोसों अब योलि हौ तौ लौंगी। औरनि के आधे नाउँ आधी नि.दौरि जाउँ, 1. राधा जू के संग पैन आधोग भएँगी । 'सेस' होत न्यारे ऐसी पीर लाये प्यारे नुमः ... अयहीं, हो : विरह, एखाने पीर हरौंगी । आज हुन ऐहै कोऊ कालि चलि जैहै सौह: परौं लगि हो. ही वाके पाय जाय पारौंगी nEen निमुनि रैनि झुकी यादर ऊ झुकि आये.. देख्यो कहाँ झिलिनि को माई झहनाति है । पानी ते न पैड़ों५ वूम पानि पसलो न सूझ, :: - .. काजर सी आज की अँध्यारी कारी राति है। . -~~.mm.imminanim- -mama.mirmirmirmirmirememom १-अकि मैडीमारान होगई।२--सीमी-पूरी हुई। ३--परी परतों।' ४-माँ-झनकार । ५-पैडो-मार्ग। "