पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/६१

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आलम केलि TE अंचर की ओट के कै फोटनि की पोट कीन्हें, .... परत फफोट हैं घयारि लागे धन की। मलय कपूर पानि राजिव के रस सानि, .. नेकहू के लागे यति जागै आगि तने की । 'पालमा सुकरि कहै यावरी है मौगिर रहे, हाइ हाइ कछू पीर पायो वाफे मन की। हम सय जतनु: जयति करि हारी अष, . . तुम ही कही सुनाय :जतन जियन की ॥१०॥ अनंगु दहतु याको · अँगन -सहत दुखं, ... ..अँगनहिं .. सीरी करी. अँगनहिं आके । फुल जलु चन्दनु समीरहुँ न ; सीरी, होति,.. अतिहिं तपति थकी सकल उपार के । कहि कवि 'बालम' न डोल औ. न बोलै चाल, नैन आँसू धार ढरै पैठो मुरझार के। मानो पिनु नौरहिं आधार येलि ढीली जाति, . फटिक सलाका दुई राखी टेक लार के २० पैननि संतोपे श्रीन, नास धान हूँ अचानी, अति हूँ अनूप श्रोप रूप तोये नैन । अधर मधुर परसत रसना • सरस, .. काम केलि मिलि सुख साँचे अंग अंग छ्यै । र-फकोट - फफोसे । २-मौगि र प हो जाती है। मानो ....... जातिमानो भिसा निकटस्थ माधार के कोई लता गिरी नाती। . - -सोनों भो। wha-me-