पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/७०

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.. • विरह को मूरि जिहि मुरली के मारे माई, निको ने भई जोगिनि वियोगिनी वैरागी है। एक परजे ते गई 'दौरी सुनि' 'यौरी"भई, ...तीको धन मेलि मुरि लैन को न भांगी है। पावन दै पीर पेम प्रावन दे पूरो नेह, . आजु हो ते जरनि जुन्हैयाह सौ जागी है। मेरो जो न कहो मानै मेरियै चलाये जाने, जागन द लाई याहि लागन दै लागी है ।१२६।। जड़ी यो जनाई 'माई किंधों काह डीटि लाई, औचक मिले । कन्हाई छतिया धरकते। घायल तराइल २ सी मानो करसाइल सी, K:परिवार वाइलसी धमति पंरिक ते । लै गई लवाय घरघाली घर धालिये को, .. होम उन्हें देतं होन वाहिर फरिक त। दोहनियो डॉरि सिर मोहनी 'डराय आई, थहर हर आई कॉपत खरिकते ॥१३०॥ ___' आपुन देही है। परदाह को विलगु' माने, ... • जानि चूमि रिझवति या कुवानि रायरी । 'पालमा, संताप तंग' ताके हतियों को तप, ताकै कु कान्ह' ताको तोहि कहाँ तायरी। D, १.१-लाय थग्नि । ३- तराइल - (सरल) चंचल ।, ".... २-करसाइल = ( कृष्णसार ) मंग। ४-याइल = पातुल (जिसे पाई बढी हो) घरपाली घरको पराव करनेवाली। ~ NNv M - - - - - - -