पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/७३

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बालम-फल 'पालम' कहै हो कहूँ ऐसियों विसासी है री, जानि चलि भई वात काहू की न मानती। मोसो मुख मोरि जिहै श्रोगनि:सो जोरि है, काहे को हो जोरौं नैनी जो हो ऐसो जानती ॥१३६॥ हियो ना सिराउ विसरोउ न बियोग धरु, माँगत मरूकै पेम पावक प्रजारी है। 'व्याकुल के जोवेकल'कोये की जहाँ लो मूरि, ___ बाँसुरी विहून बिसवेलि के बिसारी है। 'आलम रसाल गुनं जाके नसाल भयें, सोई : मुलजीवनि सजीवनी हमारी है। औपद हितावै ताहि बेदन न भावे जाहि, 1: भीरि छाँडि चीर धैर्द पीर मोहिं प्यारी है ॥१३७॥ काकी लाज काको डरु कोंन पापु कैसो धरु,... . कौन धरुवसी३ कछुवात घर को 'कहै । 'साँस लेत हिये में सलाका ऐसी सालति है, कान्ह चितयनि माई नित चित को दहै । 'श्रालम' कहैं हो परयस न वसात कळू."

भागे . न छुटै दुख, अति साथ ही गई।

पलक.ते न्यारी कीनी नदिऊ' विडारि दीनी, निसि दिन' ननदि मैं घेरी पैठोई रहे ॥१३॥ १-गानिमियतम ।' २-विहन रियाय, अजाया। ३-परपसी दिनालं, पुरवली .