पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/८४

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खंडिता व ____ रही हो नयाय नारि. पूछति पियारे के-सु, . कैसे हूँ कैसे हूँ कै· उठाय.उत माथ. ही । - मुख :तन चित, हरबरे! गहयर गरे, ... - उतरु-उसाँसु आँसु माये . एक साथ हो ॥१५॥ नये नये नेह मये- गेह नये , नये यग, . नपला नयल नीकेपारस परस हो । किरच कार कर कोर, यारी भरि हरि, ... " कर योरी देत फरकर४. उठी, रस५ ही। रीम.कपि 'श्रालामा सुभाय: ब्रजराय निसि,... ; • • भोर भये ऐसे हग कोर ती दरस हो । सारस से ; सर: से सरस..अरसौहें रस, ,रसिक रसिकसंग, जागे रास-रस ही ॥१५६॥ खंडिता वर्णन रजनी बिहाने उठे दोउ अरसाने आँग, राधे रतिरानी तैसे मोहन मनोज हैं । _ 'पालमा कह हो पल कोरनि कटाच्च देखि, ... भोर हो -खुलत मानो रातेई सरोज हैं। १-दावो-शोधता से । २--हवरे गरेंगद्गद करेंगे। ३-फोरें - कोमल करकरफड़, 1 ५- स हो-पार से। १-पिहाने = चीतने पर। .. .:. ARA