पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/८५

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पालम फेलिT" सहज की अरनाई। अरनीकी तरुनी के, अधरनि रेख राजै उपमा के चोज हैं। कुसुम बँधूक की ज्यो लीक सोह न्यारी पीय, ". । नैन के परस लागे पानी के चोज है।१६०॥ पक.सुनि योल अनयोले डोले डोले फिरें, - याँह की डुलनि मनमोहन डोलाये है अंतर ही एक हये तंत्री२ फैसे तंभ भये, .. ऐसे मंत्र काम ल फटाछति पढाये है । हेरनि अहेरी तेरी गोत को अहीरी तरी, __ हेरि हेरि मानसु. अहेरो' कर पाये है। जाके नटसाल ताके कैसे है हाल ऐसे;: । नैना तेरे लाल लाल फाके लोह"न्हाये है ॥१६१॥ / जनम चुहागी४ जिनि देहरियौ देखी नहीं, खिन में सोहागी भई ऐसो जाको भागु है । मेरी हितू कैसीऊ, पिया की हितू चित नहीं, होन ताकी पाली जामें घिरद विरागु है.। . 'सेव! प्यारे तेरी. गति कहतं.न बनि आवै. नेकु न्यारे होत हिये दीनो आय दागु है । श्रव ही की घरी ऐहै घरी कि पहर ऐहै, .

फत पीरी जाति तेरो केतक दुहागु है :१६॥

Prrrrrrrrrrrrrrmirroraman :- rrrrr.mmmmmarrrrrrrran 1-पोज = पर चिन्हें । २-तमी- तांत्रिक । ३--नरमात = फराक पीड़ा। ४-दुहागीदुर्भाग्यवती। ५-~-दुहागु-दर्भाग्य। '