पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/८६

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


सीख सी भुलाई है. कि काह घबराई है कि, ' । खीझी है। परोसिन की ऐसी जुरिधाई है । मैं हूँ होते हैं कहै- हा हा चुपके न रहै, १ . २जोई-जोई - कही सोइ करिहों • दुहाई. है । कान्ह सो पिछौडी है कि कान्ह की कनौड़ी है कि, . मौही है जु. डरपी-फै छुल अति छाई है. साँची कहाँ-बाज :तुम पायनि परत -कान्हा मेरे,..जानः दैया :फहूँ बैज देखि आई है ॥१३॥ . • तो सीढीठी. निठुर बसोठो देखो मैं न कहूँ,

मीठो मुस्न श्रागे पीठि पाछे फरै गरि सी ।

मेरे आये मेरी भई वाप याही की, है गई, ..... दई को न डरु, लोक-लाज. दई डारिसी । 'आलम' सुकषि वाई यातनि रिमाय मनु, . मुरझानो मोहन मुरी- है; वेमा मारि'सी। पान सी बनाय सुलचाय हिये लाय इत, तूं नौ चली नारि फिरि नायक को नारि सी ॥१६॥ मानस को कहा वसि कोजतु है यावरी मु... पासी, मुरवास इको. यसि के घसाऊँ.री । मैनका को स्वामी कामकन्दला को कामी भोदि.५: Fear - ही - ::-:10 • वाम .