पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/९०

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खंडिता. एनि गाढ़े जुहिया के पिय ऐसी कौन गाढी तिय, TET • गांदी गादो भुजेनि सौ गाढ़े गाढ़े गहें हो । . लाल लाल लोयन उनीदे लागि लागि जात, . सांची ही 'सेखा प्यार में तो लाल लह हो। रस बरसाता सरसात श्ररसात "गांत, ___ आये प्रात कही यात रात' कहाँ रहे 'हाँ १७३॥ भली भई भोर भये पाय धारे भावतेज, | "हमनभाती हैं 'भावतिनु" भाये हो । रोस कै कहत है न रिस कीजै रस की सु, । जाके रस रसे तिन वस'करि पायें हो। ऐसो परिहमुहियो तरकि मरीजै पै न, 'पालम' पतीजै पुनि पिय जानि पाये हो । अंग नये चिन्ह रतिरंग न दुरत नयो, । आँगन में भंग संग अंगना ले आये हो ॥२७४n जम सी जुन्हैया जरौ जागते जु जाय निसु. जामिनी के जाम जिमि जात जर्मजाल से । श्रालियो न, और अकुलाइहों- अकेली श्रय , 'पालमा ए थाली का आली पै है लालसे । पारसी ले देखोनिरसोहं हो रसिकारस-:- मसे धसे सीस केस ,भेस अलिमाल से । .१-परिहमु = खेद, शोक। Pr} -- r... '