पृष्ठ:आलम-केलि.djvu/९५

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


पालम केलिहा 'पालमा विचित पार लीनो, हित मया करि वितै चितु चोरि लीनो, हितु करि, :. हित-बिनु चित नहीं सोई सोच नित है । 'पालम, कहै हो पुर बास में जो यसी तिन्हें,. नेमुकर न चाउ निसुवासा चकित है । देखे टक लागै अनदेखे पलको न लागे,. देखे, अनदेखें -नैना निमिप : रहित है। सुनो तुम कान्द हो जु पान की, न चिन्ता.हम, .. देखेहु दुखित अनदेखे - इ दुखित है ॥११॥ धैना सुने जरनि अयोको सो सीरी होति, पायक दहे :को तेई थावक अमिय के । दूरि होते दरसिकपूर जनु पूरे पल ।। ...फूल - ते कोमल हिताने हार हिय के । 'सेख' कहै प्यारे चित घर के उजारे दिया, . कहूँ कहूँ : नैननि के तारे केह, तिय के देखे पिन -जिय नहीं, देखे -मुख जिये हम, तुम चिरंजीवो कान्ह 'जोय मेरे जिय के ॥१६॥ कलु न . सुहात. उदास . परयस घास, , जाके यस हजै तासों जीते पहारिये । 'पाहाम' कहै हो हम दुहूँ विधि थी कान्ह अगदेखे दुख देखें धीरज न. धारिये । भी ।३-भाक ' -मया-म। २-नेम-त या। -हिताने वाले लगे।