बड़ा लड़ैया जगमाँ जाहिर ठाकुर बेंदुलका असवार १२७
इतना सुनिकै फुलवा बोली मालिनि साँच देउ बतलाय॥
हाथ पैर पुरूषन के ऐसे कर्रे कर्रे परैं दिखाय १२८
इतना सुनिकै मालिनि बोली साँचे बचन करों परमान॥
भैंसि चराई बालापनमाँ माता पिता दरिद्रीजान १२९
परी व्यवस्था लरिकाई में ताको करी कहाँलगगान॥
जैसी गुजरी हमरे ऊपर ऐसी परै न काहू आन १३०
फुलवा बोली फिरि हिरिया ते मालिनि जाउ घरै यहिबार॥
काल्हि सबेरे यहि लैजायो साँची मानो कही हमार १३१
इतना सुनिकै हिरिया चलिभै अपने घरै पहूँची आय॥
फुलवा बाँदी को बुलवायो तासों चौपरिलीन मँगाय १३२
खेलन लागी मालिनि सँगमाँ आधी राति गई नगच्याय॥
लैकै पंखा बाँदी हाँकै ऊदन केर वस्त्र उड़िजाय १३३
कब्जा झलकै तलवारी का सो फुलवा के परा निगाह॥
फुलवा बोली तब मालिनिते झलकैं बगल तुम्हारे काह १३४
तुम नहिं बेटीहौ मालिनिकी औ छल किह्यो यहाँपर आय॥
सुनि मकरन्दा तुमका पाई तुरतै खोदि लेइ गड़वाय १३५
अब पहिंचाना हम तुमको है बेटा देशराज के लाल॥
जियत न जैहौ तुम महलनते औपरिगयोकालके गाल १३६
नाम तुम्हारो उदयसिंह है तुमही बेंदुल के असवार॥
इतना सुनिकै मालिनि बोली कीन्ह्योनीकीआजचिन्हार १३७
कहँ पै दीख्यो तुम ऊदन को साँचे हाल देउ बतलाय॥
इतना सुनिकै सब बाँदिनको फुलवा तुरतै दीन हटाय १३८
औ फिरि बोली बदऊदन ते मानो कही बनाफरराय॥
पृष्ठ:आल्हखण्ड.pdf/२५४
दिखावट
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
१३
उदयसिंहका बिवाह। २५१