AWA MA ( 30 ) या बोटे विचार बिना बुलाये प्रवेश न करते हों, और मानो हृदय -रूपी न्यायालय में अपने सहवर्ती नियम शीन और उचित विचारों के साथ एक न्यायासन पर बैठकर कचहरी न करते हो ? प्रोथेलो । यदि तू यह बात सोचता है कि मेरे साथ दूषित व्यवहार कियागया है और फिरतू अपने इस विचार को मौन साधकर मुझसे प्रकट नहीं करता है तो यागी तू मेरा मित्र होकर मेरे साथ कपटलीला रवता हैं। यागो। तो मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि यदि कहीं मेरा अनुभव खोटा निकले ( क्योंकि मैं इसबातको स्वीकार करता हूँ कि मेरे स्वभाव में यह दुष्टता हैं कि मैं दूसरों की काल्पनिक बुराई में भी अनुसंधान लगा बैठता हूं और मेरी संशयशील कल्पनायें कभी २ ऐसी बुराइयाँ गह बैठती है कि जिनका कहीं सिर पैर नहीं होता तो बुद्धिमान जैसे कि व्याप हैं आप मुझ जैसे व्यक्ति की बातों की जिसकी कल्पनाशक्ति अधूरी है कुछ अपेक्षा नहीं करेंगे और मेरे अनिश्चित निरीक्षण के ऊपर जिसका आधार ऐसा कच्चा है, अपने लिये कोई विपति खड़ी नहीं करेंगे। आपपर अप- ना विचार प्रकट करना मानों आपके मनमें बलवली डालनी और आपकी बुराई करनी है तथा स्यपने मनुष्यत्व, सच्चरित्रता और बुद्धि मत्ता में भी बट्टा लगाना है । प्रोथेलो । तेरा क्या आशय है ? | व्यागो । मेरे प्यारे स्वामी सुनिए नरनारी का अच्छा नाम aasti होता है सबसे प्रियमणि अभिराम । धन जो बोरे क्या वह चोरे ? है वह कुछ नहिं कुछ भी बात, वह मेरा था उसका होता रहा हजारों के वह हाथ । पर जो मुझसे मेरा अच्छा नाम कहीं लेता हैं छीन धनी नहीं वह उससे बनता मुझे बताता सचमुच दीन ।
पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१०५
दिखावट