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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१०८

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( ८३ ) भाँति जानता हूँ। वेनिस में वे गुप्तरीति से ऐसी लीलाएं करती है कि जिनको वे अपने स्वामियों को दिखला नहीं सकतीं। उनका नैतिक सिद्धान्त यह है कि- विना किये कुछ भी नहिं रखना, प्रकट उसे पर कभी न करना । प्रोथेलो-क्या ऐसा होता है ? यागो - उसने अपने पिता की आंखों में धूल डालकर आप के साथ व्याह किया है और जब वह बाहर से आपकी प्रकृति को देखकर थर र काँपती और डरती थी तब भीतर से वह आप पर व्यासक्त थी । श्रोथेलो-- हां, वह ऐसा ही करती थी । यागो-तो फिर क्या आप ऐसे भोले हैं कि कुछ नहीं सम- भते ? उसने बाल्यावस्था हो में ऐसा रूप भरा हैं कि मानो अपने बाप की आँखों पर पट्टी बांधकर उसे इस भांति अंधा बना दिया कि उसको आपके जादू टोना करने की सूझी, परन्तु मैं समझता हूँ कि मैं भारी भूल कर रहा हूँ। मैं सविनय प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझे अपने तई अत्यन्त प्यार करने के लिये क्षमा करेंगे । भोथेलो - मैं तेरा सदैव कृतज्ञ रहूँगा । यागो - मैं देखता हूँ कि इस वार्त्तालाप से प्रापका कुछ रंग-: ढंग बदल गया है । थोथेलो-कुछ नहीं, कुछ नहीं । यागो--ठीक समझिये, मुझे शंका है कि ऐसा होगया है, मैं श्राशा करता हूँ कि आप इस बातपर विचार करेंगे कि मैंने जो कुछ कहा है, वह आपके मेल से कहा है । पर मैं देखता हूँ कि आप विचलित होगये हैं । इससे मैं यह प्रार्थना करने को बाध्य हूँ कि आप मेरे कहने का अधिक विचार न करें, उससे संशयमान करले