सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:ओथेलो.pdf/११०

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

(५) वह आपके भार बापने स्वदेशियों के बीच तुलना करने लगेंग पौर कदाचित् अपने इस स्वयम्वर से पछतावेगी । प्रोथेलो- अच्छा प्रणाम, यदि तुमको कुछ और बात विदित हो तो उसकी सूचना मुझे देना । अपनी स्त्रीको उसका निरीक्षया करने में नियोजित करदेना । यागो तू अब यहाँ से जासकता है ★ या गो- श्रीमन् मैं न जाने की अनुमति चाहता हूँ । ( जाता है। ) - प्रोथेलो- हाय ! मैंने व्याह क्यों किया ! यह सच्चरित्र व्यक्ति. . निःसन्देह जितना कि मुझसे कहता है उससे कहीं अधिक देखने बाळा जानकार विदित होता है। यागो - ( वापिस घ्याकर) श्रीमन् ! मैं प्रार्थना करता हूं कि श्राप इस विषय पर अधिक सोच न कीजिये, इसे समय के ऊपर छोड़ दीजिए । यद्यपि यह उचित है कि केसियो पुनः पदस्थ किया जाय (क्योंकि निःसन्देह वह अपना काम बड़ी योग्यतासे करता है) तो भी यदि आपकी इसमें प्रसन्नता हो तो, कुछ काल पर्यन्त उसे टालते ही रहिये, इससे माप बसकी चाल ढाल और पुन:: पदस्थ होने के साधन ताड़ जायेंगे | इस बात पर ध्यान दीजिये कि आप को श्रीमती कितने बल और उग्रता से बड़ी याचना करके आप पद केसियो के पुनः पदस्थ करने के लिये दबाव डालती है। इसमें बहुत कुछ पाया जायगा । इस विषय म आप इस बात का निश्चय समझियेगा कि मैं बहुत भयाकुल रहूँगा और मैं अवश्य ऐसा ही होगया हूँ ( क्योंकि वास्तव में मैंने अयभीत होने का काम ही किया है ) और आप श्रीमती देशदामि नी को निष्कलंक विचारिये । श्रीमान् से मेरी यही प्रार्थना है मोथेलो-- तुम इस बातका भय मत मानो कि मुझ में आत्म- निग्रहको न्यूनता होगी ।