इस बीचमें यागो के वध करानेका जोड़ उलटा फल होता है, ( ११ ) अंक ५ अपनी कठपुतली रौदरियो के द्वारा केसियो तोड़ लगाता है । परन्तु इस जोड़ तोड़कर यद्यपि केलियो के चोट आती है परन्तु इस झगड़े में रौदरिगो मारा जाता है । इस मृत पुरुष की जेब से जो चिट्ठियाँ निकलती हैं किसी अंश में उनके द्वारा और किसी अश में यमिलियाके सब भंडा फोड़करदेने से यागोको दुर्जनता खुल जाती है और इस दुःखान्त नाटक का अन्त, देशदामिनी का वध करने के पश्चात्ताग में मोयेतो आत्मघात करके करता है । नाटक का प्रसंग | शेक्सपियर के प्रत्येक नाटक में किसी भजे या बुरे चरित्र का चित्र खींचकर उसका भला या बुरा परिणाम उत्तम भाँति दर्शाय गया है । विद्वानों का इस नाटक के पात्रों के चरित्र के विषय इतना मत भेद है कि इसपर एक महाभारत बन गया है इसके विषय में पूर्णरूप से विवरण करने में लेखके बढ़ जाने का भय है। सुक्ष्मरीति से यह नाटक स्त्री संदेह, ईर्षा, संशय और व्यविश्वास का द्योतक है। झूठे प्रपवाद और दिखावटी बातों से स्त्रियों के श्राचरण पर संदेह करने का क्या परिणाम होता है, हलकी झांकी इसमें दिखलाई गई है। दुर्जनों के फेर में पड़कर सज्जन भी मनजान्न में कैसे मनर्थकर बैठते हैं तथा उत्कट का फलभी उत्कटही होता है इनके दृश्य इस नाटक में पाठकों की आँखों के आगे भाते हैं। नाटक पात्रों के चरित्र । मोथेलो-ओथेलो सूरजातिका है। ऐसा अनुमान किया जाता है कि वह एक असभ्य हवशी था। वह स्वयं अपने को कृष्णा व का बतलाता है और उसका एकवेरी उसको मोटे होठोंवाला कहना.
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