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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१३

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( ११ ) | किन्तु उसका असभ्य होना नहीं पाया जाता है। यह राजवंश जन्मा था और एक शूर तथा शिष्ठ पुरुष था । उसका धर्म ईसाईथा यह सुशिक्षित था और उसका रहन सहन उच्च कक्षा का था। ओ वक्तृता उसने राजसभा में दी थी उससे वह बुद्धिमान् उदार कल्प- नाशक्ति वाला और किसी अशमें उसका कवित्व से परिचित होना भी पाया जाता है । परन्तु उसकी कल्पनाशक्ति प्रति यदी बढ़ी थी, आवश्यकता से अधिकभी थी वह दृढप्रतिज्ञ और निश्चत्त हृदय बीर था पर साथी इसके उसके मनोविकार बढे प्रवल होते थे और वह क्रोधी प्रकृति का भी था । पहिले तो उसको किसी पोर झुकाना बडा कठिन था, परंतु जहां वह झुका कि जिधर झुक गये जिधर फिरे फिर गये कि कहावत उसपर चरितार्थ होती थी। पीछे उसको दूसरी श्रोरका ध्यानही नहीं रहता था। वह जिस धुन में पड़ जाता था उसको पूरा किये विना नहीं छोड़ता था । इसका यह एक प्रचल दृष्टान्त है कि वह इतने बचपद तक पहुंच गया था। कभी २ प्रयन्त मनोविकार के होने से उसकी विवेचन शक्ति कुंठित होजाती थी और वह उसके वशीभूत होकर अनर्थ कर बैठता था । इसको उसने केसियों के पदच्युत करने पर स्वयं स्वीकार किया हैं और इसी छिद्र के द्वारा यागो को उसे वहकानेका अवसर मिलगयाधा कोधी स्वभाव बड़ा हानिकारक होता है, किन्तु जहां वह दृढ़ता और कर्त 'व्य ज्ञान से सम्मिलित होता है उससे उत्तम चरित्र की नीव भो पढ़ती है। यह बात श्रोधेनो में विद्यमान थी । उसपर यौवनकाळा में बड़ी आपत्तियां पड़ी थीं और इस कारण से उसमें धीरज की मात्रा बढ़ी हुई थी। यात्रा करनेसे और साहसिक कार्यो में पढ़ने से उसके मन का विकाश होगया था, उसमें निरीक्षण और प्रध्यवसाय की प्रसुर शक्ति के हो गई थी। वह यथार्थ सैनिक युवा था और शासन करने