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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१३१

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A ( १०६ ) के सियो- तुम घर से कैसे चली आई ?मेरी परम सुन्दरी वियेका तुम कुशलपूर्वक हो ? धर्मकी शपथ प्राणप्यारी मैं तुम्हारे ही घर भाता था 1 विथका---और मैं तुम्हारे डेरेपर जारही थी। एक सप्ताह तक अलग रहना, वाह ! वाह ! यह क्या बात हुई ? सानदिन और सात रात ? आठवीली और पाठ घंटे और पर भी विराह के घंटे जो प्रेमासकों के लिये घड़ी के बतलायें हुये घंटों से कितने ही वे मालूम पड़ते है। उप बिना बहाती भारी होता है। विसमय केलियो-विवेक के बनाकर में इसी बड़ी जिम्ता में निमग्न था पर अब मुझे कुछ काम मिले तो में अनुष स्थिति की लव कसर एक सायही निकाल दूँगा | प्यारी विदा ! ( उसे देशवासीकाल देता है ।) शुरू इसी नमूने का एक दूसरा रूमाल बनादेना । विडियो! यह कहाँ से आया ? श्रवण यह बतता किसी नई सखीचा प्रेमचिन्ह है। मुझे तुम्हारी अनुपस्थिति का यथार्थ कारण जान पड़ा है। क्या ऐसी नौबत आपहुँची है ? अच्छा देखा आवना । केलियों-खरी जा बातें बनाती है, वे पापी भावनाओंौको शैतान के शिर डालें, जिसने वे तेरे मस्तिष्क में टोंसी हैं। अब तू सन्देही होगई है जो ऐसी बात कहती है कि यह किसी नायिका का प्रेरक है। सच कहता हूँ वियंका पैसी कोई बात नहीं है । आया ? बियंका अच्छा फिर यह किसका है प्रापके पास कहां से केलियो में इन दोनों में से एक बात भी नहीं जानता हूँ। मैंने उसे -अपने कधरेमें पड़ा हुआ पाया है । मुझे इसका काम बड़ा पसं