(१०७.) इसके वापिस मांगे जाने के पहिले ( ऐसा होना संभव है ) मैं यह चाहता हूँ कि इसी नमूने का और दूसरा तय्यार होजाय । अच्छा इसको लेने और दूसरा तय्यार करदे तथा अब मुझे यहाँ ही कोड़दे faint मैं प्रापको क्यों छोड़हूँ ? केलियो मुझे अहां सेनापति महाशय से मिलना है, इस बात में अपनी नामवरी महीं समझता और न मैं इस बातको चाहताही कि ये किसी स्त्री के साथ मुझे देखपावे । वियंका-क्यों, रूपाकरके इसका कारण तो बदलाइये । केलियो-इसका कारण यह नहीं है कि में तुमको प्यारा नहीं मानता । विवेकान्हां यही कारण है कि तुम मुझे प्यारी नहीं मानते । अच्छा तो कुछ दूरतक मेरे साथ चलो और कहो कि तुम मुक् प्याज को ही मिलोगे या भाई ? केलियो- मैं तुम्हारे साथ थोड़ी ही दूरतक चल सकता हूँ । क्योंकि मुझे यहाँ उपस्थित रहना चाहिये । परन्तु मैं तुम से शीघ्र मिलूँगा । 1 वियंका-प्रच्छा देखा जायगा तुझे साविक स्थिति के अनुसार चलना चाहिये । { जाती है चौथा क पहला इन्दु के सामने । दृश्य-दुर्ग यागो क्या ध्याप ऐसा सोच सकते प्रोथेलो- क्या सोच सकते हैं ? यागो ! यागो-क्या रहस्यमें* चुम्बन करना अच्छा है ?
- रहस्य = एकान्त
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