(११७) भोथेलो- (अपने थाप ) ईश्वर की शपथ, वह मेराही रूमान होगा !. वियंका- हाँ, और प्राज रात खाना खाने को आना हो तो भाजाना, नहीं तो फिर जब तुम्हारा बुलावाहो तब थाना । (जाती है) यागो-जाओ, उसके पीछे जाओ । केसियो-धर्म की शपथ, मुझे जाना पड़ता है नहीं तो वह. बाज़ार में मुझे गालियाँ दे बैठेगी 1 यागो - क्या तुम रातको उसके यहाँ खाना खाओगे ? केसियो- सचमुच मेरी इच्छा ऐसी ही है । यागो-मच्छा यदि अवसर मिला तो मैं भी आऊँगी, और तुम्हारे साथ वार्तालाप का श्रानंद चठाऊँगा । केसियो- मेरी प्रार्थना है कि आप अवश्य थाना । याभोगेन ? यांगो - अच्छा जाओ, अधिक कहने की ध्यावश्यकता नहीं है । ( केसियो का गमन । ) प्रोथेलो - (आगे बढ़कर) यागो ! इसका वध मैं कैसे करूँगा? यागो आपने देखा है न ? वह अपने पापकर्म पर. खिलखिला कर हँसताथा ? - प्रोथेलो-हाय ! मैंने देखा है, यागो । यागो और श्रापने रूमाल भी देखा है ? प्रोथेलो-क्या वह मेरा था ? कैसे यागों मेरे सिरको सौगंध, वह आपका ही था । और आपने इस बात को भी साँपा कि वह आपको मूर्ख स्त्रीको किस दृष्टि से देखता है ? आपकी स्त्रीने रूमाल उसे दिया है और उसने वह रूमान रंडीको देखाला है । थेलो- मैं अब उसको धमंत काल तक प्रतियातना देकर
पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१४२
दिखावट