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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१५५

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( १३० ) । .. देशदामिनी- क्या यह उचित और योग्य है कि मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया जाय ? मेरा ऐसा कानसा व्यवहार है कि जिससे मेरे किसी छोटे से छोटे काम में उनको रत्ती मात्र भी दूषण मिल सकता था ? ( यागो के साथ यमिलिया का पुनः प्रवेश । ) यागो - महाशथा ! ध्यापकी क्या आशा है ? आप कैसी हैं ? देशदामिनी- मैं कह नहीं सकती हैं । जो छोटे बच्चों को भी समझाते हैं, वे मृदुल साधन और सुगम कार्य भार के द्वारा ऐसा करते हैं । उनको मुक्के इसी भांति डांटना चाहिये था, क्योंकि व की शपथ, मुझे सुधारने के लिये छोटी से छोटी घुड़की भी बहुत होती । जैसे किसी बच्चे के लिये कटुवचन की आवश्यकता नहीं : होती, वैसे ही मेरे लिये भी नहीं हैं। यागो-क्या बात है श्रीमती यमिलिया - मेरे भशोक है कि श्रीमान ने इनके लिये ऐसे कुवाच्य रंडी इत्यादिका प्रयोग किया है और ऐसे घृणायुक्त और कटुवचन उच्चारण किये हैं कि जिनको निर्मल चित्त के लोग सह नहीं सकते हैं। देशदामिनी- यागो, क्या मैं ऐसे दुर्नाम से पुकारे जाने के योग्य हूँ । को यागो-कैसे सुशील श्रीमती ? देशदामिनी- जिससे कि धमिलिया कहती है मेरे पति ने मुझ चुकारा है। यमिलिया- उन्होंने इन्हें रंडी कहा है, एक मदमस्त भिखमंगा भी अपनी नीचसे नीच वेश्या के लिये ऐसा शब्द प्रयोग न करता यागो क्या उन्होंने ऐसा कहा है ? ....... Chap 62 ...