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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१६५

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..: (१४०) यमिलिया-इससे कुछ भी संभावना नहीं होती है । देशदामिनी – लोगों को मैंने ऐसा कहते सुना है | हाय ! ऐसे ओ पुरुष होते हैं। हाय! ऐसे भी पुरूष होते हैं । यमिलिया, क्या तू सचमुच ऐसा विचार करती है, बोज यमिलिया, क्या ऐसी भी स्त्रियां होती हैं, जो अपने पतियों का ऐसी अनुचित रीति से अनादर करती हैं ? यमिलिया- इस में सन्देह नहीं है कि कुछ ऐसी होती हैं । देशदामिनी-यदि सारी संसार की संपत्ति भी तुझको कोई देनी करे तो क्या तू ऐसा आचरण करेगी। यमिलिया- क्यों, क्या आप नहीं करेंगी। देशदामिनी - इस स्वर्गीय ज्योति की शपथ, मैं ऐसा कदापि नहीं करूंगी । यमिलिया- मैं भी खुले खजाने ऐसा काम कमी नहीं करूँगी, छिपकर चाहे भले ही ऐसा कर लूँ ! देशदामिनी -- यदि सारी संसार की संपत्ति भी तुझको कोई देनी करे तो क्या तू ऐसा घ्याचरण करेंगी । यमिलिया - संसार तो बड़ी भारी वस्तु है, ऐसे छोटे कुकर्म के लिये वह बड़ा मोल है। wwwww मैं सु देशदामिनी--सचमुच में समझती हूँ तू कदापि ऐसा नकरेगी। यमिलिया - सच, मैं समझती हूँ मैं अवश्य पेला करूँगी और जब मैं ऐसा कर चुकँगी तो उसका प्रायश्चित्त यह होगा कि उसले मेरा पति जगत् का सम्राट् बन जायेगा । मरियम की शपथ, हाग मुद्रिका के लिये अथवा मजमंत्र के थानों के जिये या लहंगों या प्रक्रियों के लिये या ओढनियों के लिये या किसी क्षुद्र उपहार के लिये ऐसा कभी नहीं करूंगी, किन्तु यदि ऐसा करूँगी तो संसार भरी