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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१६८

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17 Imm .. 2 ( १४३ ) .. रौदरिगो-तू पास ही रहना, कदाचित मैं चूक जाऊँ । यागो-मैं पास ही हूँ, बीर बनकर डटा रह ( हटजाता है ।) रौदरिगो - सब बातों पर विचार करने से यह काम मेरे लिये बड़े महत्व का नहीं है, तो भी उसने इसके लिये संतोषजनक कार बतलाये हैं। इससे केवल एक ही मनुष्य तो संसार में कम होगा। बस मेरी तलवार आगे बढ़ी नहीं कि वह पंचत्वको प्राप्त हुआ । यागो - (आपही आप ) मैंने इस नवयुवा गुंडे को खूबही भड़का दिया है और यह क्रोध में भरा हुआ है । अब चाहे यह केलियों का बधकरे या केसियो इसका या इनमें से एक दूसरे का काम कर डाले, प्रत्येक बात में मेरा लाभ ही है । यदि रौदरिगो जीवित रहता है तो वह मुझ से उन बहुमूल्य सुवर्ण के प्राभूषणों और मणियों' को वापिस मांगेगा जो मैंने देशदामिनी को भेंट देने का मिल करके उससे उये हैं। ऐसा कदापि नहीं होना चाहिये । यदि केसियो जी-" वित रहता है तो उसके चरित्र में ऐसा उस्कर्ष है कि उसके सामने मैं महान नीच दिखाई पड़ता हूँ। और इसके अतिरिक्त यह भी शंका है कि सूर उसले मेरा सब भेद खोल डाले । इसमांति मैं बड़े असमंजस में हूं। नहीं । उसका मरजाना अतिआवश्यक है, परन्तु मुझे अब चुप रहना चाहिये क्योंकि उसके आने की आहट सुनाई देरही है। ( केसियो का प्रवेश १) रौदरिगो-मैं उसकी चालढाल जानता हूँ, यह वही है दुष्ट तेरी मृत्यु भागई है। (पटता है और केसियो पर प्रहार करता है ।) केसियो - इस चोट से मेरा काम पूराही होजाता, पर इस बातको तू.. नहीं जानता है कि मेरा कोट कैसा अभेद्य है, मैं तेरी खूबखबर लूँगा (अपनी तलवार निकालता है और रौदरिगो पर प्रहारकरता है) मौदरियो - हाय ! म मरा । 1