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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१७३

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( १४८) यागो - केसियो, प्रवतुम कैसे हो?अरे डोली लाभो होली खाभो! ग्रन्थानो -क्या यह रौदरियो है ! यागो - हाँ वही है, वही है ( एकढोली लाई जाती है | ) i ' बाह, प्रच्छा हुआ डोली आगई है, कोई सज्जन एसको साब धानीले यहाँ से जामों में सेनापति के शस्त्र--विकिक को बुलाने को जाता हूँ। (विकासे ) वाईजी ! झाप फलेश न उठावे । केसियो -यह मनुष्य जो यहाँ मरा पड़ा है मेरा प्यारा मित्र था। तुम्हारे और उसके बीच क्या शत्रुता थी ? केलियो - कुछ भी नहीं, मैं उसको जानतामी नहीं है । यागो - त्रियकाले ) क्यों बाईजी ! तुम पीजी क्यों पड़गई हो उसपर वायु मत जमने दो । कोरीयो और रौदरिगो लेजाये जाते हैं ) सज्जन महारायो, आपलोग थोड़ा ठहरें । ( त्रियंकाले ) बाईजी ! तुम पीली क्यों दिखलाई पड़ती हो ? ( प्रत्यानों- खोदोविको से ) क्या आप उसकी आँखोंको विकरालता को निहार रहे हैं ? ( विकासे ) चाहे तुम विना एक शब्द कहे इसभाँति ताकती रहो किन्तु हमपर सबभेद शीघ्रही प्रकट होजायगा (खोदाविको प्रत्यानोसे) उसको मनीभाँति दखियेगा, में प्राप वेब शर्थना करता हूं कि आप उसका निरीक्षण कीजियेगा, महाशय आपने देखा है उसके मुँहकी व्याकृति से उसका पाप स्पष्ट दिखलाई पड़ता है, उसके बोलने की कुछ आवश्यकता नहीं है । ( यमिलिया का प्रवेश ) यमिलिया- हाय हाय ! क्या बात हुई है! स्वामिन्! बागो फैलियो पर रातको अँधियारी में रौरिगो भौर कुछ