( १४९) अभ्य लोगोंने जो चंपत होगये हैं अाक्रमण किया है वह अधमरा पड़ा है और शैदरिगो पंचवको प्राप्त होगया है । यमिलिया- हाय हाय ! वह एक भद्र पुरुष था। सुजन के सियो के लिए मुझे शोक होता है ! 1 यागो - यह वेश्याओं की संगतिका फल है|यमिजिया, मैं तुझसे प्रार्थना करता हूँ तू जा और इस बातका अनुसंधान कर कि केसियो ने प्राज रात भोजन कहां किया है । ( विधङ्का से ) यह क्या ! तु इस बातपर क्यों कांप उठी हो ? वियंका-उसने मेरे घरपर भोजन किया है, पर मैं इस बात से नहीं कांपती हूँ। sher यागो - यह बात क्या हुई है ? तो मैं तुझपर अभिशाप जगाता । मेरे साथ चल | यमिलिया- धिक् धिक् रंडी ! तझपर धिक्कार है ! वियंका- मैं रंडी नहीं हूँ, और मेरा आचरण ऐसा ही शुद्ध है जैसाकि तुम्हारा है, जो मुझपर ऐसा दोषारोपण करती हो । यमिलिया जैसाकि मेरा आवरण है। छिःतुिझपर धिक्कार है। थागो-- ( जोदोविको प्रत्यानो से ) दयाशील सज्जनों, चलें और देखे केसियो पर पट्टी बांधी गई है या नहीं ? ( वियंका से ). श्राश्रो वाईजी, तुमको तो हमसे कुछ और ही कहानी कहनी है। यमिलिया ! तुम दुर्ग को दौड़कर जाओ और जो कुछ हुआ है इसकी सूचना मेरे स्वामी और स्वामिनी को देदो । ( लोदोषिको श्रस्यानो से ) क्या आप आगे पधारेंगे ? ( अपने आप ) माज रातको यातो मेरी पूर्ण कार्यसिद्धि होती है या सत्यानाश लगता है। ( सब जाते हैं ) MPSC TAN
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