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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/१८०

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( १५५ ) मोथेलो - यह कोलाहल कौन करता है ? क्या वह अभी नहीं मरी है? अभी पूर्णरूप से नहीं मरी है? इतना निठुर होनेपर भी मैं फिर दयावान होगया हूँ। मैं तुझको यह दुःख अधिक देतों नहीं सहने दूंगा, यह के यह ले ( फिर गला घोंटता है | ) यमिलिया - ( नेपथ्य में ) क्या हो रहा है? हे मेरे प्रभु! हे मेरे प्रभु! अंग्रेजो-कौन है ? यमिलिया -- ( नेपथ्य में ) है मेरे दयाशील प्रभु ! मैं आपसे एक बात कहने पाई है । श्रोल- हां, यह यमिलिया है में क्षणभर में उसको आने दूँगा वह मरगई है । यह संभव है कि वह केसियों की मृत्यु का समाचार सुनाने आई है, उसने बड़ी बिल्ली पुकार की है। हाय अय वह हिलती डुलती नहीं है वह ऐसी स्तब्ध होगई है जैसी कि समाधि होती है। क्या इससमय उसको माने देना चाहिये ? क्या यह बात ठीक होगी ? मैं सोचता हूँ कि फिर वह हिलती है, नहीं नहीं हिलती है । क्या करना प्रभीष्ट है ? यदि वह भीतर आवेगी तो अवश्य मेरी पत्नी से बातचीत करेगी। मेरी पत्नी ! मेरी पत्नी ! मेरी पत्नी कौन है ? मैं कोई पत्नी नहीं है । हाय ! यह फैला मेरी सा है ! कैसा दुर्मुहते है ! मुझे इससमय सब अधकारमय सूकता है, मानो चंद्रमा और सूर्य पर बड़ा लंबा खमास ग्रहण जगगया है और पृथ्वी ऐसा परिवर्तन होनेसे भयभीत होकर फट गई है। पमिलिया - ( नेपथ्य में ) मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ कि मुझे आपसे कुछ कहना है, हे मेरे दयालु प्रभो ! प्रोथेलो-मोहो ! मैं तुमको भूलगया। या यमिलिया भीतर चली मा-थोड़ी देर ठहर, मैं तुझे भी बुलाता हूँ ( अपने भाप )