( १५९ ) यमिनिया--जो भारी से भारी अनिष्ट तू मेरे लिए करसकता. है करडा | इसकार्य के करने से जैसे तू स्वर्ग आने के योग्य नहीं रहा है, वैसे ही तू देशदामिनी के योग्य नहीं था । प्रोथेलो-ब तू चुप होजा । यही सबसे अच्छी बात है । यमिलिया में क्यों चुप रहूँ ? मुझे जितना क्लेश सहने की शक्ति है, तुझको मुझे उसका आधा क्लेश पहुँचाने की शक्ति भी नहीं है। अरे भौं ! परे अनाड़ी ! कीच के समान ज्ञानशून्य ! तूने ऐसा अन्धेर किया है कि मैं तेरे खड़की रत्तीमात्र भी चिंता नहीं करती । चाहे मेरा बीस बार भरा होजाय मैं तेरा भंडा फोडूंगी । अरे कोई है? सहायता करो ! सहायता करो ! सहायता करो! मुरने मेरी रानीको मारडाला हूँ 1 खून होगया है ! खून होगया है ? { मौनतेनो, प्रत्यानो और यागोका प्रवेश ) मौनता-क्या मामला है ! कहिये सेनाधिपति क्या बात है ! यमिलिया - हां ! यागो तुम भले आये। तुमने यहबात अच्छी की है जो लोगों को अपने किये हुए खूनोंका तुम्हारे मत्थे मढ़नेका अवसर मिले। ग्रत्यानो-क्या बात है ? यमिजिया -- यदि तुम मनुष्य हो तो इस दुष्ट के कथन कर खंडन करो। वह यह कहता है कि तुमने उससे यह बात कही थी कि उसकी स्त्री दुश्चारिणी थी। मैं समझाती हूँ कि तुमने यह बात कभी नहीं कहीं होगी क्योंकि तुम ऐसे दुरात्मा नहींहो । शीघ्र बोलो मेरा मन करा ध्याता है । यागो-मेरा जो झपणा विचार या यह मैंने उनसे कहा था र से अधिक मैंने कुछ नहीं कहा और उनको अपने आप यह निश्चय होगया था, कि मैंने सच्ची बरी बात कही थी। यमिविया परन्तु क्या तुमने कभी उससे यह बात कही थी कि वह कुजटा थी !
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