( २० ) क्या डालती है । भोथेलो उसका इतना सन्मान नहीं करता है कि जितना उसके पदके अनुकूलथा यदि वह सन्मान योग्य होत तो चा प्रोथेको उसपर क्रोधित भी होगयाथा वह उसको एकद्म पदच्युत नहीं करता । केसियो का हल्कापन उस के मदिरापान करनेसे और पदच्युत होनेपर भी वियं के साथ हास्यक्रीडा करनेसे भली भाँति प्रकट होता है। उसके चरित्र मे चंचलता और विचार तथा भामा शासन में न्यूनता पाई जाती है। पदच्युत होनेके पीछे पहिलेतो उस ने ओथेलो के समीप जानेकाहीं नहीं ठहराई । पन्त जब यागोने उसको पट्टी पढ़ाई तो वह तुरंत देशदामिनीके पास उपस्थितहोगया फिर उसने ऐसी भारी भूलकी कि प्रोथेलोको माते देखते ही वसे उठ खड़ा हुआ, जिससे श्रोथेलोके हृदय में पहिले पहल सन्देह का सूत्रपात हुआ, जो पीछे ऐसे अनर्था पातका कारण होगया । यमिलिया-यमिलिया एक बहुत साधारण पर प्रति सांसारिक स्त्री है। वह चली हुई चाल पर चलती है, और उसको जीवन या कर्तव्य कर्म के जो महान् लक्ष्य हैं, उनका ज्ञान नहीं है । उसका चाल खलन भी अच्छा होना नहीं पाया जाता। पर देशदामिनीकी सुसंगति का उस पर बड़ा अच्छा प्रभाव पड़ा है-यहां तक कि sia में उसन सत्यका पक्ष लेकर यागो की कलई खोलदी । बथार्थ में इसका कोई चरित्र नहीं है । रौदरिगो-रौदरिगो का भी कोई चरित्र नहीं है । वह एक साधारण व्यक्ति है। जब वह नाटक के प्रारंभ में प्रकट होता है उख में कोई अंकित करने योग्य बात नहीं दीखती है। वह एक बेनिम्न का चला है जो देश पर मोहित था। ऐसा पाया जाता है कि वह किबी रईसका लाब्जाथा - और जैसे बहुधा ऐसे युवक दुध
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