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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/२३

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( २३ ) थाही नहीं । पहिले उसने रूमालका पता नहीं दिया पीछे जब बात बिगड़ चुकी तब दिया। बड़े लोगों को बहुत छोटी से छोटी छुटिय या बुराइयां बिगाड़ देती हैं चाहे वह छोटों को या दुट्टों को नहीं बिगाड़ती हैं। किसी जोंके दो टुकड़े करदीजिये वह दो जीव होकर चलने लगती है | मनुष्यको कोई छोटी से छोटी अंगुली काटदीजिये उसको बड़ी भारी पीड़ा होती है इत्यादि इत्यादि । मेरी समझ से शेक्सपियर का अभिप्राय इस नाटक से यह भी है कि यह संसार मूढ़ों के लिये नहीं है || समाधान ! हमलोग दुःखात नाटकों को पढ़ना पसन्द नहीं करते हैं। और इस नाटकको पढ़ने से तो अत्यन्त ही दुःख होता है। कुछ यूरोपीय विद्वानों को भी जिनके देशमें दुःखान्त नाटक बेड महत्त्र सम आते हैं, इसके अध्ययनसे मानसिक क्लेश हुप्राहै। एक तो यह कह बैठा है कि अच्छा होता यदि शेक्सपियर इस नाटक को लिखता हो नहीं। पर जो संसार की मलाई दुःखान्त नाटकों से हो सकती है और जो शिक्षा उनसे मिलती है वह सुखान्त नाटकों से नहीं मिजसकती । "यागो" जो दुष्टों का दुष्ट था वह तो जीवित रहे-बेचारी देशदा मिनी, बेचारा श्रोतो और यमिलिया अपमृत्यु के ब्रास दरों यह ARE में नाटककी नीति विरुद्ध प्रतीत होता है परंतु यदि विचार करके देखा जाय तो देशदामिनी इखही योग्य थी, वह इस संसार में रहने के योग्य नहीं थी कि जहां ऐसे दुष्टोंसे अधिक पल्ला पड़ता है कि जिनसे अपने को बचाने को बुद्धि और शक्ति उसमें नहीं श्री उसको अपने पिता का शाप लगा । देशदामिनीको निरपराध मारने से ओथेलो का प्रघात बंदी न्याययुक्त और महत्व का है। यमि-