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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/२८

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. श्रीपरमेश्वरो जयति शेक्सपियर-नाटकमाला प्रथम पुरुष । - ओथेलो । 1

  • पहला अङ्क *

पहला दृइन-बेनिसकी एक गली | ( रौदरिगो और यागो का प्रवेश । ) | रौदरिगो-त ! मुझसे मत बोल मुझे यह बात बहुत बुरी लगती है कि तु यागो ने जिसके ऊपर मैंने अपने तोड़े तोड़े- न्योछावर कर दिये, जान बूझकर भी मुझसे यह बात छिपाई । यागो-ईश्वर जाने, मैं इस बातको नहीं जानता था । परन्तु तुम अपनी ही कहते जाओगे और मेरी एक नहीं सुनोगे । यदि मुझको इसका शान स्वप्न में भी हुआ हो तो मेरा मुँह मत देखना रौदरिगो-तूने तो मुझसे कहा था कि तू उसको देख नहीं सकता। यागो-यदि ऐसी ही बात न हो तो मेरे मुँह पर थूक देना। इस नगर के तीन रईसोंने स्वयं उसके पास जाकर मुझे अपना सहकारी बना देनेके लिये मेरी सिफारिश उससे की थी, यहां तक कि उन्होंने अपनी टोपियाँ तक उसके पैरो में रखदीं थीं। पर उसको इतना गर्व है कि उसे