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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/३४

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( ९ ) 2) प्रवेशो- तू कैसा दुरात्मा है जो ऐसी बातें बकता है। यागो - महाशय, मैं ऐसा पुरुष हूँ जो आप से यह कहने को माया हूँ कि आप की पुत्री और भूर इस समय एक इस भांति के पशु बने हुए हैं जिस की दो पीठ होती हैं। प्रवेशो-तू एक नराधम है । यागो श्राप तो हैं- राजसभाट् । ववंश-तू इसका उत्तरदाता होगा । रौदरिगो, मैं तुमको भली भाँति जानता हूँ । रौदरिंगी- महाशय, मैं प्रत्येक बातका प्रतिवाद करूंगा । पर मैं मापसे प्रार्थना करता हूं कि यदि आपकी यह इच्छा हो और आप पूर्ण ज्ञानसे इसमें सम्मत हो ( जैसा कि मैं समझता हूं किसी प्रश मैं आप हैं ) कि भापकी सुन्दरी पुत्री घोर रात्रि में १२-१ बजे के बीच एक ऐसे व्यक्ति के द्वारा जो एक भाडेका ट्टू खेवट है और किसी इशामें परिचर होतेक योग्य नहीं है; भगाई जाकर एक कामी सूरके दुरालिंगन पेड़, और यदि आप इससे जानकार हैं और इस में आपकी संगति है तो हमने धूर्तता से आपका नकट अपराध किया है। किन्तु यदि आप इस बातको नहीं जानते हों तो मुझे अपने शुभा- चरणले बोध होता है कि आप हमारे वास्ते हुए करते हैं जो इलभांति रुट होकर धमकाते हैं। आप set कभी विश्वास न करें कि शिष्टता की सीमा को उल्लंघन करके मैं आप श्रीमान् का हँसी करता । मैं फिर भी कहता हूं कि यदि व्यापते उसको अनुमति नहीं दी है तो आपकी दुहिताने बड़ा ऊधम मचा दिया है। उसने अपने कृत्य, सुन्दरता, वुद्धि और भाग्य का संयोग एक ऐसे मर्यादारहित और भ्रमणकारी विदेशी से किया है जो न यहाँ का हैन वहां का है। आप सीधे भीतर जाकर अपना समाधान करलीजिये । यदि आपकी आत्मजा, अपनी कोठडी या आपके घर में हो तो इस