विज्ञप्ति | अँग्रेज कविशिरोमणि शेक्सपियर से हिन्दीपाठक भलीभाँति परिचित हैं । इनके प्रसिद्ध २ नाटकों के सार कहानियों के रूपमें प्रकाशित हो चुके हैं। उनमें से कई उपन्यास रूपमें भी करचुके हैं। कई नाटक पूर्ण रूपसे भी अनुवादित होगये हैं । यह नाटक "प्रोयेलो" जो पाठकों की भेंट किया जाता है कहानी और उपन्यास की कूटामें प्रकट होचुका है । परन्तु इसका पूरा अनुवाद अमोतक नहीं हुआ था इस नाटक का तीसरा अंक शेक्सपियर के सब लेखों में अत्यन्त प्रभा- वशाली कहा जाता है। मैं इस बात को स्वीकार नहीं करसकता कि यक्ष ऋनुवाद जैसा होना चाहिये ठोक तैसा हुआ है । पवका मनुवाद यथोचित ऐति से पद्य में ही होना चाहिये था, परन्तु ऐसा नहीं हो सका है । प्रायः अनुवाद सब गद्य में ही किया गया है । वह भी साधारण । परन्तु जब इस बात पर विचार कियाजाता है कि शेक्सपियर के काव्यों का प्राजकल हिन्दी में विकाश सा होरहा है- पहले कहानी निकली- फिर उपन्यास - मौर तरनंतर साधारण गद्यमय नाटक तो यह प्राशा भी की जासकती है कि किलीदिन वे सांगोपांग भो बनजायेंगे । यदि हिन्दी पाठकों को इस कृति अवलोकन से सम्पूर्ण मूलका कुछ रस भी प्राप्त होजाय तो मैं अपना परिश्रम सफल समकूँगा । यदि यह अनुवाद पाठकों को रविकर हुआ और भवकाश मिला तो कुछ अन्य नाटकों के अनुवादमी जो अभीतक नहीं हुए हैं क्रमशः प्रकाशित कियेजायेंगे || मुरादाबाद श्रीपंचमी संवत् १९७३ निवेदक-- } गोविन्दप्रसाद घिलब्धारू ।
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