( ३८ ) 66 पर आकर कतार बाँधे खड़े हैं तथा जहाज, जहाज चिल्ला रहे हैं। केलियो मैं आशा करता हूँ और सोचता हूँ कि यह भी महोदय का जहाज होगा । ( तोपों की फैर सुनाई देती है । ) दूसरा भद्रपुरुष -- वे तोपें अभिवादन कर रही हैं। कोई हमारे मित्र ही पाये हैं । केसियो - महाशय, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप वहाँ पधारिये और लौटकर हमको ठीक र सूचना दीजिये कि वे कौन आये हैं । दूसरा भद्रपुरुष - मैं जाता हूँ । ( जाता है ) मौनतेनो- -पर भला सुजन सहकारीजी, यह तो बतलाइयेगा कि क्या आपके सेनापति महाशयका व्याह होगया है ? केसियो- उनका परिणय बड़ा आनन्दमय हुआ है। उनके हाथ एक ऐसी सुकुमारी जगी है कि जिसका कुछ वर्शन ही नहीं हो- सकता, और न जिसकी उपमा किसी बड़ी नामी से नामी सुन्दर और मनोहारिणी स्त्री से ही दी जासकती है । उसकी प्रशंसा करना कवियोंको विचित्र लेखनी की शक्ति से बाहर है, उसकी वास्तविक सुन्दरता और छवि ऐसी अलौकिक है कि चित्रकार की विविष भाव दर्शक कूँची भी उसकी तसवीर खींचने में हार मान जाती है । ( दूसरे भद्रपुरुषका फिर प्रवेश | } कहो अब क्या समाचार है ? कौन आया है ? दूसरा भद्रपुरुष - वह एक यागो माया है जो सेनापति का पताकाबाहक है । केलियो - उसकी यात्रा अति उत्तम और आनंदमयी हुई है। क्या घनघोर अाधियोंने, क्या उमेड़ हुए समुद्रोंने, क्या बंद पथनों ४१.
पृष्ठ:ओथेलो.pdf/६३
दिखावट