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पृष्ठ:ओथेलो.pdf/६५

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(80) देशदामिनी-हाँ पर मुझे इस बातसे भय है कि तुम्हारा साथ कैसे छूट गया ? केलियो - प्रणव और अंतरिक्ष का घोर छन् युद्ध होने से हमारा संग बिछुड़ा है । ( नेपथ्य में जहाज ! जहाज | तोपोंकी और सुनाई देती है । ) दूसरा भद्रपुरुष - वे हमारे दुर्ग को सलामी करते हैं। यह भी हमारा कोई मित्र ही है। केलियो जाइये, समाचार लाइये । ( दूसरा भद्रपुरुष जाता है ! ) प्यारे पताकावाहक ! आपका शुभागमन हो । (मिलिया में ) बाईजी ! आपका शुभागमन हो । प्रिय थागो ! इस बावसे खिन्न होना कि मैं चालढाल में इतना बढ़कर आता हूँ । यह मेरे अच्छे कुलका शिष्टाचार है और किसी कुटिल इच्छासे मुझे ऐसा करने का साहस नहीं हुआ है। ( यमिलिया का चुम्बन करता है } यागो - महाशय, यदि वह आपको अपने घरोंसे इस भाँति प्रहार करती जैसे कि अपनी जिवासे वह मेरा प्रहार करती है- तब तो भाप छ्क जाते । देशदामिनी- शोक ! मेरी समझ में तो उसमें एक त्रुटि यह है कि वह अधिक चुप रहती है। यागो - सचमुच, वह बहुत ही चुप रहती है । मेरी जब सोनेकी इच्छा होती है, तब भी मैं उसको चुपचाप हो पाता हूँ | fast शपथ, आप श्रीमती के सन्मुख तो मैं इस बातको स्वीकार करता हूँ कि वह अपनी वाग्युद्ध की बामको अपने मनमें छिपाये रखती है वह अपने विचारों को शब्दों में प्रकट नहीं करती : w